नई दिल्ली। शादी का झूठा वादा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में ‘कुंडली न मिलने’ का बहाना बनाकर शादी से मुकरने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत धोखे से यौन संबंध बनाने का अपराध बनता है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने एक आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए की। आरोपी जयंत वत्स जनवरी 2026 से न्यायिक हिरासत में है।
पीड़िता (प्रॉसिक्यूट्रिक्स) ने आरोप लगाया कि आरोपी और उसका परिवार 2018 से जानते थे। आरोपी ने बार-बार शादी का भरोसा दिलाया, यहां तक कि कुंडली मैचिंग का भी आश्वासन दिया। इसी भरोसे पर जुलाई 2019 से कई बार शारीरिक संबंध बने – कार में, आरोपी के घर, होटल और अन्य जगहों पर। आखिरी घटना सितंबर 2025 में बताई गई। पीड़िता ने पहले शिकायत की थी, लेकिन आरोपी और परिवार के शादी के वादे पर उसे वापस ले लिया। बाद में आरोपी ने कुंडली न मिलने का हवाला देकर शादी से इनकार कर दिया। नवंबर 2025 में वापस शिकायत के बाद जनवरी 2026 में केशव पुरम थाने में FIR दर्ज हुई – IPC धारा 376 (बलात्कार) और BNS धारा 69 के तहत।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से साफ है – आरोपी ने पीड़िता को बार-बार भरोसा दिलाया कि कुंडली कोई बाधा नहीं बनेगी। बाद में उसी आधार पर इनकार करना प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी है। जस्टिस शर्मा ने टिप्पणी की: “यदि कुंडली मैचिंग आरोपी और उसके परिवार के लिए इतनी महत्वपूर्ण थी, तो इसे शुरुआत में ही सुलझा लेना चाहिए था, न कि शारीरिक संबंध बनाने के बाद बहाना बनाना।” अदालत ने माना कि आरोपी का आचरण BNS धारा 69 के दायरे में आता है, जो कपटपूर्ण तरीकों (जैसे झूठा शादी वादा) से यौन संबंध बनाने को दंडनीय बनाती है – इसमें 10 साल तक की सजा हो सकती है।
आरोपी की दलीलें: संबंध आपसी सहमति से थे, दोनों 8 साल से जानते थे, और शादी का झूठा वादा दुष्कर्म नहीं बनाता। लेकिन अदालत ने इन तर्कों को जमानत के लिए पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ रिश्ते टूटने का मामला नहीं, बल्कि धोखे से बनाए गए संबंध का है। आरोप पत्र अभी दाखिल नहीं हुआ, इसलिए इस चरण पर जमानत का कोई ठोस आधार नहीं।
यह फैसला फॉल्स प्रॉमिस ऑफ मैरिज के मामलों में नया आयाम जोड़ता है, खासकर जब कुंडली जैसे सांस्कृतिक कारणों का बहाना इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि BNS धारा 69 पुरानी IPC धारा 375/376 से अलग, स्पष्ट रूप से झूठे वादे या धोखे से संबंध बनाने को अपराध मानती है।

