📍 मकर संक्रांति की खुशियां मातम में बदलीं, पतंगबाज़ों की ज़िद ने लीं 20 से ज्यादा जानें
खुशी, उल्लास और शुभता का प्रतीक मकर संक्रांति का पर्व इस बार देश के कई हिस्सों में मातम और चीख-पुकार में बदल गया। प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझे की खरीद-बिक्री और उसके इस्तेमाल की ज़िद ने इसे ‘उड़ता ब्लेड’ बना दिया, जिसने देशभर में अब तक 20 से अधिक मासूम जिंदगियां छीन लीं।
सबसे ज्यादा मौतें गुजरात से सामने आई हैं, जहां 10 लोगों की जान गई, इनमें एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल हैं। राजस्थान के कोटा में 5 साल का मासूम बच्चा, जबकि गुजरात के सूरत में 7 वर्षीय बालक चाइनीज मांझे की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठा।
इसके अलावा पटना, लखनऊ, जयपुर, भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में भी 8 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि यह खतरा किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहा।
क्यों इतना खतरनाक है चाइनीज मांझा?
चाइनीज मांझा साधारण पतंग की डोर नहीं, बल्कि मौत का हथियार है। इसे बनाने में नायलॉन या पॉलिस्टर के बेहद पतले धागे पर पिसा हुआ कांच, एल्युमिनियम, स्टील या टंगस्टन कार्बाइड पाउडर और मजबूत गोंद की कोटिंग की जाती है। यही वजह है कि यह मांझा इंसान की नसें तक काट देता है, दोपहिया वाहन सवारों के लिए तो यह सीधा जानलेवा साबित हो रहा है। इसी कारण इसे ‘फ्लाइंग ब्लेड’ भी कहा जाता है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त प्रतिबंध, फिर भी बेखौफ कारोबार
सुप्रीम कोर्ट ने 2017 से ही चाइनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद बाजारों में खुलेआम इसकी बिक्री और त्योहारों के दौरान इसका बेरोकटोक इस्तेमाल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कहीं न कहीं लोगों की लापरवाही, पतंगबाजी की सनक और प्रशासन की ढीली निगरानी ने चाइनीज मांझे को एक बार फिर मौत का दूत बना दिया है।
❓ सवालों के घेरे में सिस्टम
🔹प्रतिबंध के बाद भी चाइनीज मांझा बाजारों तक कैसे पहुंच रहा है?
🔹त्योहार से पहले सख्त अभियान क्यों नहीं चलाए गए?
🔹कब जागेगा प्रशासन और कब रुकेगी निर्दोषों की मौत?
✍️ अपील
मकर संक्रांति जैसे पर्व खुशियां बांटने के लिए होते हैं, जान लेने के लिए नहीं। अब वक्त है कि प्रशासन सख्ती दिखाए और आम नागरिक भी जिम्मेदारी समझें, ताकि अगला त्योहार किसी और परिवार के लिए मातम न बन जाए।

