फिरोजाबाद: जिले के जसराना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में नसबंदी (ट्यूबेक्टॉमी) ऑपरेशन के दौरान एक महिला की आंत फट गई, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। महिला को तुरंत जिला मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां आपातकालीन ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई गई। परिजनों ने ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।
नगला पीपल गांव निवासी संगीता (35) की आशा कार्यकर्ता ने परिवार नियोजन के तहत नसबंदी के लिए जसराना सीएचसी ले जाया था। संगीता के घर में पहले से छह बच्चे हैं। ऑपरेशन के दौरान लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया में इस्तेमाल ट्रोकार आंत में लग गया, जिससे आंत फट गई और आंतरिक चोट आई। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत महिला को फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य डॉ. योगेश गोयल और सीएमएस डॉ. नवीन जैन की मौजूदगी में देर रात तक इमरजेंसी ऑपरेशन चला। डॉ. नवीन जैन ने बताया कि महिला की स्थिति जोखिम भरी थी, इसलिए तुरंत ऑपरेशन शुरू किया गया। महिला अब खतरे से बाहर है, लेकिन घटना को लेकर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
डॉक्टरों का पक्ष और परिजनों का आरोप
जसराना सीएचसी के चिकित्सा प्रभारी डॉ. विमल उपाध्याय ने कहा:
“ऑपरेशन में कुछ जोखिम हमेशा रहते हैं। महिला को पहले से कुछ परेशानी थी। ट्रोकार आंत में लग गया, हमने तुरंत रेफर कर दिया। जो भी घटना हुई है, अत्यंत निराशाजनक है।”
मरीज की ननद सरोज ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन में लापरवाही बरती गई। उन्होंने कहा कि संगीता परिवार नियोजन के लिए ऑपरेशन कराने गई थी, लेकिन अब उसकी जान पर बन आई। परिजन जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
नसबंदी ऑपरेशन में जोखिम और सरकारी दिशानिर्देश
नसबंदी (ट्यूबेक्टॉमी) एक सामान्य परिवार नियोजन विधि है, लेकिन लैप्रोस्कोपिक तरीके में ट्रोकार या इंस्ट्रूमेंट से आंतरिक अंगों को चोट लगने का जोखिम रहता है, खासकर अगर मरीज में पहले से कोई समस्या (जैसे एडहेशन या मोटापा) हो। स्वास्थ्य विभाग के दिशानिर्देशों में प्री-ऑपरेटिव स्क्रीनिंग, अनुभवी सर्जन और इमरजेंसी सुविधाएं अनिवार्य हैं। फिरोजाबाद जैसे जिलों में आशा कार्यकर्ताओं के जरिए कैंप चलाए जाते हैं, लेकिन कई बार बुनियादी सुविधाओं की कमी से ऐसी घटनाएं हो जाती हैं।

