आगरा: ताजनगरी आगरा में जालसाजी का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस, कोर्ट और आम लोगों को हैरान कर दिया। एक आरोपी ताराचंद शर्मा (गांधी नगर निवासी) ने 12 साल पहले खुद को ‘मृत’ साबित करने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) बनवाया और कोर्ट में पेश कर अपने खिलाफ चल रहे मुकदमे को बंद करवा दिया। लेकिन नवंबर 2025 में वह जीवित पाया गया – वह न केवल जिंदा था, बल्कि शान से स्कूटी चला रहा था और डिजिटल बैंकिंग भी इस्तेमाल कर रहा था।
पूरा मामला क्या है?
- केस की शुरुआत: 1999 में राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी केस में ताराचंद शर्मा आरोपी था। यह मामला धोखाधड़ी या संबंधित आरोपों से जुड़ा था, जिसमें गैर-जमानती वारंट जारी थे।
- फर्जी मौत का खेल: गिरफ्तारी से बचने के लिए ताराचंद (या आरोपी पक्ष) ने नगर निगम से सांठगांठ कर 2013 में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया, जिसमें उसे 14 दिसंबर 1998 को मृत घोषित कर दिया गया। थाना हरीपर्वत पुलिस ने भी पड़ोसियों से हस्ताक्षर कराकर ‘मृत्यु’ की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की।
- कोर्ट का फैसला: इन दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट ने 2013 में ताराचंद को मृत मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई बंद (उपशमित/निरस्त) कर दी। अन्य आरोपियों की मौत हो चुकी थी, इसलिए केस पूरी तरह बंद हो गया।
स्कूटी ने खोल दी पोल
नवंबर 2025 में वादी राजकुमार वर्मा ने गांधी नगर में ताराचंद को स्कूटी चलाते देख लिया। शक होने पर उन्होंने फोटो खींची और आरटीओ से स्कूटी की डिटेल निकाली। रिकॉर्ड में सामने आया कि ‘मृत’ ताराचंद ने 2016 में अपने नाम से स्कूटी रजिस्टर कराई थी। साथ ही वह नेट बैंकिंग और डिजिटल ट्रांजेक्शन में भी सक्रिय था – जो ‘मृत’ व्यक्ति के लिए असंभव है।
पुलिस जांच में जीवित मिला आरोपी
कोर्ट के आदेश पर थाना न्यू आगरा पुलिस ने जांच की। एसआई मधुर कुशवाह आरोपी के घर पहुंचे और ताराचंद को जीवित पाया। उसके बेटे आशुतोष शर्मा ने भी कबूल किया कि पिता जीवित हैं, उम्र ज्यादा होने से घर पर रहते हैं लेकिन कभी-कभी स्कूटी से बाहर निकलते हैं। पुलिस ने ताजा तस्वीरें और रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी है। अब ताराचंद पर धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जी दस्तावेज), 468 (जालसाजी) सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई हो सकती है। फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले नगर निगम कर्मचारियों और पुलिस की भूमिका पर भी जांच हो सकती है।
यह मामला आगरा में फर्जी दस्तावेजों और कानूनी सिस्टम की कमजोरियों पर बड़ा सवाल उठा रहा है। पुलिस और कोर्ट अब पुराने केस को दोबारा खोलने की प्रक्रिया में हैं।

