फतेहपुर सीकरी/आगरा: सूफ़ी संत हज़रत शेख़ सलीम चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के साहबज़ादे हज़रत ताजुद्दीन उर्फ़ वाले मियाँ चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का 465वाँ सालाना उर्स मुबारक शनिवार 24 जनवरी को अकीदत, मोहब्बत और एहतराम के साथ मनाया गया। ऐतिहासिक दरगाह में दूर-दूर से हजारों जायरीन पहुंचे, जिन्होंने भाईचारे और इंसानियत का पैग़ाम देते हुए इस पाक मौके को यादगार बनाया।
इस अवसर पर सज्जादा नशीन हाजी मुकीम चिश्ती ने ख़ानदानी रस्मों और रिवाजों के मुताबिक़ क़ब्रगाह पर ग़ुस्ल की रस्म अदा की। बताया गया कि यह रस्म साल में केवल एक बार शाबान माह की 3 तारीख को अदा की जाती है। सज्जादा नशीन ने श्रद्धा और विधिवत तरीके से क़ब्रगाह का पर्दा व चादर हटवाकर समयबद्ध ढंग से रस्म पूरी कराई, ताकि किसी प्रकार का विलंब न हो।
उर्स के दौरान सभी धर्मों के मुरीदों और सेवकों ने गुलाब जल, केवड़ा, चंदन आदि चढ़ाए, जिन्हें बाद में अकीदतमंदों में तबर्रुक के रूप में वितरित किया गया। सज्जादा नशीन और समाजसेवियों ने जायरीनों के लिए विशेष लंगर का इंतज़ाम किया, जिसमें मुस्लिम, हिंदू, सिख सहित सभी वर्गों के लोगों ने दिल खोलकर हिस्सा लिया। यह आयोजन गंगा-जमुनी तहज़ीब की जीती-जागती मिसाल बना, जहां अमन, मोहब्बत और एकता का संदेश गूंजा।
सभी रस्में संपन्न होने के बाद रात्रि करीब 9 बजे मशहूर कव्वाल मोहम्मद शमी नियाज़ी ने हज़रत वाले मियाँ चिश्ती की शान में कई सुरीले कलाम पेश किए। मौजूद अकीदतमंद झूम उठे और कव्वाली के दौरान फूलों व पैसों की जमकर वर्षा हुई, जिससे माहौल और भी रौनकदार हो गया।
इस खास मौके पर मौजूद प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं:
- एम.बी.डी. कॉलेज के प्रबंधक अब्दुल जब्बार उर्फ़ भूरी सिंह
- शाहरुख खादिम-ए-चिश्ती, हाजी आरिफ, डॉ. मोहम्मद मुस्तकीम
- सद्दाम प्रधान, फक्को चौधरी, मेहराज भाई
- पार्षद शकील उस्मानी
- मुलायम सिंह, यूथ ब्रिगेड प्रदेश सचिव राशिद हसन चिश्ती
- रूहुल अमीन, जर्नलिस्ट नौशाद कुरेशी
- मोहम्मद अली, दिलशाद समीर, पूर्व नगर अध्यक्ष गब्बर कुरैशी
- रमजान उस्मानी, नकीम मास्टर, यूसुफ टेलर
- सगीर मुस्तफाई, अल्ताफ कुरैशी, गफ्फार मियां
- सत्तार भाई, इमरान मेंबर, नकीम मेंबर, इदरीस अहमद
- बशीर-उल-हक़ रोकी, शहीद अहमद, बंटी सिकरवार
- चेयरमैन प्रतिनिधि मोहम्मद इस्लाम
सैकड़ों अकीदतमंद और गणमान्य लोग मौजूद रहे। उर्स के सफल आयोजन में प्रशासन का भी भरपूर सहयोग रहा, जिससे कोई असुविधा नहीं हुई।
इस पाक मौके पर मुल्क, शहर और क़स्बे में अमन, तरक़्क़ी और खुशहाली के लिए खास दुआएँ की गईं। हज़रत वाले मियाँ चिश्ती की दरगाह सूफ़ी परंपरा और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बनी हुई है, जो हर साल लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
- रिपोर्ट – दिलशाद समीर

