मुरैना/मप्र।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में देश एवं प्रदेश निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। केन्द्र सरकार द्वारा ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने के उद्देश्य से एक नवीन एवं महत्वाकांक्षी योजना “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)” लागू की गई है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों, किसानों एवं मजदूर वर्ग के चहुमुखी विकास को सुनिश्चित करेगी।

यह विचार प्रदेश के राजस्व मंत्री एवं मुरैना जिले के प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा ने मंगलवार को जिला मुख्यालय मुरैना स्थित एक निजी होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

प्रभारी मंत्री वर्मा ने बताया कि इस अधिनियम 2025 के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 125 दिवस के रोजगार की गारंटी प्रदान की गई है, जबकि पूर्व में मनरेगा के अंतर्गत 100 दिवस का प्रावधान था। वन क्षेत्रों में निवासरत अनुसूचित जनजाति परिवारों को अतिरिक्त 25 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य “हर हाथ को काम” उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि कृषि के व्यस्त समय जैसे बुवाई एवं कटाई के दौरान पर्याप्त श्रमिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को एक वित्तीय वर्ष में 60 दिवस की अधिसूचित अवधि निर्धारित करने का प्रावधान किया गया है, इस अवधि में अन्य कार्य नहीं कराए जाएंगे। इससे किसानों को समय पर श्रमिक उपलब्ध हो सकेंगे। योजना के अंतर्गत गोपालन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा तथा प्रत्येक जिले में स्टॉल एवं बाजार लगाकर किसानों के प्राकृतिक उत्पाद आमजन को उपलब्ध कराए जाएंगे।

वर्मा ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। सामान्य राज्यों के लिए 60 प्रतिशत केन्द्रांश एवं 40 प्रतिशत राज्यांश, जबकि पूर्वोत्तर एवं पर्वतीय राज्यों के लिए 90 प्रतिशत केन्द्रांश एवं 10 प्रतिशत राज्यांश का प्रावधान किया गया है। जहां मनरेगा में 86 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान था, वहीं इस नई योजना के अंतर्गत 1 लाख 51 हजार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

उन्होंने बताया कि यदि किसी ग्रामीण परिवार को मांग करने के बावजूद तय समय-सीमा में रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो राज्य सरकार बेरोजगारी भत्ता देने के लिए बाध्य होगी। वहीं मजदूरी भुगतान में विलंब होने पर मुआवजे के रूप में अतिरिक्त राशि प्रदान की जाएगी। मजदूरी भुगतान की समय-सीमा को 15 दिवस से घटाकर 7 दिवस कर दिया गया है।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि योजना में पंचायती राज संस्थाओं—ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत एवं राज्य रोजगार गारंटी परिषद—की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, गैर-अधिसूचित जनजातियां, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, महिला मुखिया परिवार, दिव्यांग मुखिया परिवार, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं वन अधिकार अधिनियम के हितग्राही, छोटे एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी।

योजना के अंतर्गत सभी निर्माण कार्यों की जियो-टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग, बायोमैट्रिक हाजिरी, डिजिटल भुगतान प्रणाली, रियल-टाइम डेटा अपडेट, मोबाइल मॉनिटरिंग एवं जीपीएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होगी। उन्होंने बताया कि अधिनियम में शिकायत निवारण तंत्र भी बनाया गया है एवं कुछ दंडात्मक प्रावधान भी किए गए हैं, जिससे योजना में जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

इस अवसर पर समाजसेवीगण एवं प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मीडिया द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रभारी मंत्री ने शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन दिया।

🔹जिला ब्यूरो चीफ मुरैना मुहम्मद इसरार खान

"गांव से शहर तक, गलियों से सड़क तक- आपके इलाके की हर धड़कन को सुनता है "जिला नजर" न्यूज़ नेटवर्क: नजरिया सच का

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