आगरा/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर जनसंख्या और महिलाओं के मुद्दे पर राजनीतिक तूफान उठ गया है। AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने मुरादाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए विवादित नारा दिया – “हम दो, हमारे दो दर्जन”। उन्होंने मुसलमानों से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की और कहा कि इससे देश मजबूत होगा। अपने परिवार का उदाहरण देते हुए बोले, “मेरे 8 बच्चे हैं, बड़े भाई के 16 बच्चे हैं। हमारी मां की उम्र 97 साल है और उनके कम से कम 72 नाती-पोते जवान हैं। बच्चे अल्लाह की देन हैं, जब तक देते रहें तब तक लेते रहिए।”

इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है। यूपी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने कड़े शब्दों में निंदा की और इसे महिलाओं के अपमान से जोड़ा। डॉ. चौहान ने कहा, “शौकत अली और इनकी जैसी मानसिकता वाले लोग अपने ही समाज की महिलाओं का अपमान कर रहे हैं। ये महिलाओं को बच्चे पैदा करने की मशीन मानते हैं। चार-चार शादियां सिर्फ ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए करते हैं। महिलाओं की सेहत, उनकी जिंदगी इनके लिए कोई मायने नहीं रखती।”

उन्होंने मुस्लिम समाज की महिलाओं से अपील की: “अब समय आ गया है कि आप अपने जमीर की आवाज सुनें और इस तरह की सोच के खिलाफ खुलकर सामने आएं। बुर्के और नकाब से बाहर निकलकर अपनी आवाज बुलंद करें। ऐसे लोगों का बहिष्कार करें।” डॉ. चौहान ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा, “आगरा में मुमताज महल को लगातार बच्चे पैदा कराने से कम उम्र में मौत के मुंह में पहुंचा दिया गया, फिर उनकी याद में ताजमहल बनाया गया।”

हिजाब-बुर्के वाली महिलाओं को PM/CM बनाने के बयानों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, “पहले अपने घर की महिलाओं को घर की मालकिन बनाइए, उन्हें सम्मान दीजिए। उसके बाद मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनाने की बात कीजिए।” उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे बयान अशिक्षित और कमजोर वर्ग को गुमराह करते हैं, जिससे महिलाएं सबसे ज्यादा पीड़ित होती हैं। यदि डेमोग्राफी बदलने का इरादा है, तो देश का नेतृत्व इसे गंभीरता से देखेगा।

डॉ. बबिता सिंह चौहान ने शासन से मांग की है कि शौकत अली के बयान की जांच हो और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि महिलाओं के खिलाफ इस सोच को रोका जा सके।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:

इस बयान पर अन्य पार्टियों से भी तीखी आलोचना हो रही है। कुछ नेताओं ने इसे जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों का मजाक बताया। AIMIM की ओर से अभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन विवाद तेजी से फैल रहा है।

यह मामला यूपी में महिलाओं की सुरक्षा, जनसंख्या नीति और सामाजिक समरसता पर नई बहस छेड़ रहा है। सोशल मीडिया पर #HumDoHamareDoDozen ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग दोनों पक्षों में अपनी राय रख रहे हैं।

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