लखनऊ। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत राज्य कर्मचारियों पर पारदर्शिता को लेकर सख्ती जारी है। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के नियम-24 के तहत सभी कर्मचारियों (ग्रुप A से D तक) को अपनी चल-अचल संपत्ति (मूवेबल और इमूवेबल प्रॉपर्टी) का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करना था। मूल समय सीमा 31 जनवरी 2026 थी, लेकिन कई कर्मचारियों की लापरवाही के कारण 47,816 कर्मचारियों (ग्रुप C: 34,926+, ग्रुप D: 22,624+, ग्रुप B और A सहित) का जनवरी-फरवरी वेतन रोका गया।
अब मुख्य सचिव एसपी गोयल ने नया शासनादेश जारी कर राहत देते हुए अंतिम मौका दिया है – 10 मार्च 2026 तक विवरण अपलोड करने वाले कर्मचारियों को रुका वेतन तुरंत जारी किया जाएगा। लेकिन सख्त चेतावनी:
- पदोन्नति (DPC मीटिंग में विचार नहीं किया जाएगा)
- एसीपी लाभ
- विजिलेंस क्लियरेंस
- अन्य कैरियर एडवांसमेंट पर रोक रहेगी।
शासनादेश में स्पष्ट है कि 10 मार्च के बाद पोर्टल लॉक हो सकता है, और अनुपालन न करने पर विभागीय जांच, सस्पेंशन या अन्य कार्रवाई हो सकती है। सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से कड़ाई से पालन करवाएं और रिपोर्ट भेजें।
क्या अपलोड करना है?
- चल संपत्ति: बैंक बैलेंस, शेयर, गोल्ड, वाहन आदि (31 दिसंबर 2025 तक)
- अचल संपत्ति: जमीन, मकान, फ्लैट आदि (खरीद/बिक्री का पूरा विवरण)
- परिवार के सदस्यों की संपत्ति भी शामिल (कुछ मामलों में)
यह कदम भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता बढ़ाने का हिस्सा है। जनवरी 2026 में 68,000+ कर्मचारियों का वेतन रोका गया था, जो अब घटकर 47,816 रह गया है। सरकार का कहना है कि यह नियम सभी पर बराबर लागू है – कोई छूट नहीं। कर्मचारी संगठनों में हलचल है, लेकिन सरकार सख्त रुख पर अड़ी है। प्रभावित कर्मचारियों को सलाह दी जा रही है कि तुरंत पोर्टल पर लॉगिन कर विवरण अपडेट करें।

