लखनऊ/बाराबंकी: उत्तर प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार (13 फरवरी 2026) को बड़ा हलचल मचा जब लखनऊ एसटीएफ की विशेष टीम ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और टीवी पैनलिस्ट मनोज यादव को बाराबंकी के सफदरगंज इलाके से हिरासत में ले लिया। पिछले दो दिनों से ‘लापता’ बताए जा रहे मनोज यादव को उनके साथियों के साथ पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद उनका मेडिकल परीक्षण बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया और अब उन्हें बाराबंकी कोर्ट में पेश करने की तैयारी है।

क्या है पूरा मामला?

बाराबंकी पुलिस के प्रेस नोट और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • 11 फरवरी 2026 को सफदरगंज थाने में एक महिला (कलावती) की तहरीर पर मनोज यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
  • आरोप: महिला को धमकी देना, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल, छेड़छाड़ और एससी/एसटी एक्ट के तहत गंभीर धाराएं।
  • महिला ने आरोप लगाया कि मनोज यादव ने रास्ता रोककर अपमानजनक व्यवहार किया और जाति आधारित गाली-गलौज की।
  • 12 फरवरी की शाम मनोज यादव एक तिलक समारोह (काकोरी इलाके) में गए थे, उसके बाद घर नहीं लौटे। उनकी पत्नी प्रभा देवी ने लखनऊ के गोमती नगर विस्तार थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
  • शुक्रवार सुबह एसटीएफ ने बाराबंकी के सफदरगंज क्षेत्र से उन्हें और साथियों को हिरासत में लिया।

सपा की प्रतिक्रिया और सियासी घमासान

गिरफ्तारी की खबर मिलते ही सपा हमलावर हो गई। पार्टी ने पहले सोशल मीडिया पर मनोज यादव के ‘गायब’ होने की चिंता जताई थी और पुलिस से तलाश की मांग की थी।

  • सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने एक्स (X) पर पोस्ट किया: “मनोज यादव की अनैतिक गिरफ्तारी और उन्हें गायब रखना भयावह है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के राज में लोकतंत्र का खात्मा और पुलिसिया गुंडाराज का विस्तार हो रहा है। उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।”
  • सपा इसे भाजपा की साजिश बता रही है और पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है।

मनोज यादव (उर्फ बबलू) सपा के पूर्व मीडिया इन-चार्ज और सोशल मीडिया पर सक्रिय नेता हैं। वे अक्सर टीवी डिबेट्स में भाजपा पर हमला बोलते रहे हैं। यह गिरफ्तारी यूपी की सियासत में नया विवाद खड़ा कर रही है, खासकर जब सपा और भाजपा के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है।

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