आगरा: थाना किरावली क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मानवाधिकार उल्लंघन का मामला सामने आया है। निर्दोष किसान राजू शर्मा (उम्र लगभग 42 वर्ष) के साथ पुलिस द्वारा अमानवीय तरीके से थर्ड डिग्री यातनाएं दी गईं, जिसके कारण उनकी दोनों टांगें टूट गईं और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संज्ञान लिया है और आगरा पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर 18 फरवरी 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 19 फरवरी को मामले में आगे की कार्यवाही की जाएगी।

घटना का पूरा विवरण:

यह मामला पिछले साल अगस्त में हुई एक हत्या (पूर्व फौजी बनवीर सिंह की संदिग्ध मौत) से जुड़ा है। पुलिस ने 20-21 दिसंबर 2025 को राजू शर्मा को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। आरोप है कि थानाध्यक्ष नीरज कुमार के निर्देश पर उन्हें उल्टा लटकाकर डंडों से बुरी तरह पीटा गया। पिटाई इतनी बर्बर थी कि 5 डंडे टूट गए और राजू बेहोश हो गए। हालत बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाया, लेकिन परिवार को सूचना नहीं दी। मेडिकल रिपोर्ट में दोनों टांगों में फ्रैक्चर और शरीर पर कई चोटें पाई गईं। पीड़ित का दावा है कि वे उस समय हत्या वाली जगह पर नहीं थे (अगरा शहर में थे)।

मामला उजागर होने पर पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने तुरंत कार्रवाई की:

  • थानाध्यक्ष नीरज सिंह,
  • उपनिरीक्षक धर्मवीर सिंह,
  • कांस्टेबल रवि मलिक को निलंबित किया गया।
  • एसीपी (अछनेरा) रामप्रवेश गुप्ता को हटाकर ट्रांसफर किया गया।

लेकिन पीड़ित पक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ता अधिवक्ता नरेश पारस (जिन्होंने शिकायत दर्ज की) का कहना है कि दोषियों के खिलाफ अब तक कोई FIR या मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। जांच अधिकारी पर सवाल उठ रहे हैं कि वे पीड़ित की चोटों और दर्द को नजरअंदाज कर रहे हैं, खासकर रिटायरमेंट के करीब होने के कारण।

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