मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर ने वृंदावन सहित कई इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। बाढ़ की विभीषिका के बीच संत प्रेमानंद महाराज अपने शिष्यों के साथ स्टीमर के जरिए यमुना के विराट स्वरूप के दर्शन करने और प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने निकले। इस दौरान उनके चेहरे पर दुख के भाव स्पष्ट नजर आए।
संत प्रेमानंद का दौरा
संत प्रेमानंद महाराज ने करीब एक घंटे तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने यमुना की बेकाबू धार और डूबे हुए इलाकों को शांत मन से देखा। इस दौरान उन्होंने लोगों से बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने का आह्वान किया। संत ने कहा, “यह समय एकजुट होकर पीड़ितों की सहायता करने का है। यमुना माता के इस स्वरूप में भी उनकी कृपा है, लेकिन हमें मानवता के लिए कार्य करना होगा।”
बाढ़ ने मचाई तबाही
मथुरा में यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ने से हालात बेकाबू हो गए हैं। तेज बहाव के कारण लक्ष्मीनगर में एक-एक मंजिल तक पानी भर गया है। वृंदावन की सदर बाजार, जयसिंहपुरा समेत दर्जनों कॉलोनियां जलमग्न हो गई हैं। घाट डूब चुके हैं और सड़कों पर पानी भर गया है। जिले के 45 गांव टापू बन गए हैं, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।
प्रशासन का राहत कार्य
प्रशासन ने अब तक 9,000 लोगों को रेस्क्यू कर राहत शिविरों में पहुंचाया है। राहत और बचाव कार्य में टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं। जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में भोजन, पानी और दवाइयों की व्यवस्था की है, लेकिन बाढ़ का दायरा बढ़ने से चुनौतियां बढ़ रही हैं।
स्थानीय लोगों में चिंता
वृंदावन और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग बाढ़ की स्थिति से चिंतित हैं। स्थानीय निवासी रमेश चंद्र ने बताया, “हमारा घर और दुकान पानी में डूब गए हैं। प्रशासन मदद कर रहा है, लेकिन हालात बहुत खराब हैं।” कई लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
आगे की चुनौतियां
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना जताई है, जिससे यमुना का जलस्तर और बढ़ सकता है। प्रशासन और स्वयंसेवी संगठन राहत कार्यों में जुटे हैं, लेकिन बाढ़ प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ने से संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।
- रिपोर्ट – राहुल गौड़

