आगरा: अब आगरा में जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री के लिए पुरानी तीन मंजिला इमारत की फिसलन भरी सीढ़ियों पर चढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बुजुर्ग, दिव्यांग, गंभीर बीमार या शारीरिक रूप से असमर्थ लोग अब घर बैठे ही अपनी प्रॉपर्टी रजिस्ट्री करा सकेंगे – सब-रजिस्ट्रार खुद उनके घर पहुंचेंगे।

सहायक महानिरीक्षक निबंधन (एआईजी) योगेश कुमार ने बताया कि “होम विजिट पंजीकरण” सुविधा शुरू की गई है। जो लोग कार्यालय नहीं आ सकते, उनके लिए यह व्यवस्था है। प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • आवेदक को संबंधित सब-रजिस्ट्रार को प्रार्थना पत्र देना होगा।
  • बीमारी या शारीरिक अक्षमता का विवरण बताना होगा (जरूरत पड़ने पर इलाज के दस्तावेज)।
  • पारदर्शिता के लिए आवेदक की स्थिति का वीडियो भी भेजा जा सकता है।
  • इस सुविधा के लिए 5,100 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा (यह सरकारी कोष में जमा होगा)।
  • स्टांप ड्यूटी और सामान्य पंजीकरण शुल्क अलग से देय रहेगा।

सदर तहसील में पांच सब-रजिस्ट्रार कार्यालय तीन मंजिला भवन में हैं। सीढ़ियां घिस चुकी हैं, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांगों के फिसलने के हादसे आम हैं। बरसात में जोखिम और बढ़ जाता है। इस नई सुविधा से अब गंभीर मरीजों को जोखिम भरी सीढ़ियां चढ़ने नहीं पड़ेंगी।

जेल में बंद कैदियों के लिए स्पेशल सुविधा निबंधन विभाग ने जेल में निरुद्ध बंदियों को भी बड़ी राहत दी है। अगर कोई कैदी अपनी संपत्ति बेचना या खरीदना चाहता है, तो सब-रजिस्ट्रार जेल परिसर में जाकर रजिस्ट्री कराएंगे।

  • कैदी को जेल अधीक्षक को जानकारी देनी होगी।
  • अधीक्षक डीएम को सूचित करेंगे।
  • डीएम के निर्देश पर टीम जेल जाएगी और विलेख पंजीकृत करेगी।
  • इसके लिए सिर्फ 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क लगेगा।

एआईजी योगेश कुमार ने कहा, “हमारा उद्देश्य प्रक्रिया को सुलभ और मानवीय बनाना है। वृद्धावस्था या गंभीर बीमारी के कारण जो लोग कार्यालय नहीं आ सकते, उनके लिए विभाग प्रतिबद्ध है। यदि कहीं भ्रष्टाचार होता है, तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।”

यह सुविधा उत्तर प्रदेश के निबंधन विभाग की पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित पहल का हिस्सा है। आगरा के अलावा अन्य जिलों में भी ऐसी व्यवस्थाएं लागू हो रही हैं, लेकिन सदर तहसील में यह तुरंत प्रभावी है।

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