फतेहपुर सीकरी/आगरा। ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) क्षेत्र में वायु प्रदूषण और गिरते भूजल स्तर की दोहरी मार सबसे ज्यादा फतेहपुर सीकरी क्षेत्र झेल रहा है। फतेहपुर सीकरी नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती शबनम इस्लाम ने सूक्ष्म धूल कणों (एसपीएम) की अत्यधिक मात्रा को जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए ताज ट्रिपेजियम जोन प्राधिकरण से तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि फतेहपुर सीकरी स्वयं प्रदूषण का प्रमुख स्रोत नहीं है, बल्कि राजस्थान की ओर से आने वाली धूलभरी हवाओं के कारण यहां की वायु गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, जिसका सीधा असर स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
सूक्ष्म कणों से बढ़ रहा स्वास्थ्य खतरा
पालिका अध्यक्ष के अनुसार, वायु प्रदूषण में 2.5 माइक्रोन या उससे छोटे पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5) की भूमिका सबसे अधिक खतरनाक होती है। ये सूक्ष्म कण श्वसन के साथ शरीर के भीतर पहुंचकर फेफड़ों और श्वसन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि टीटीजेड के कई क्षेत्रों में प्रदूषण समस्या है, लेकिन फतेहपुर सीकरी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इसका असर ज्यादा प्रत्यक्ष दिख रहा है।
हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए भूजल सुधार जरूरी
श्रीमती शबनम इस्लाम ने टीटीजेड अथॉरिटी के चेयरमैन और आगरा मंडलायुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि हरित क्षेत्र का विस्तार और घनत्व तभी संभव है, जब क्षेत्र का भूजल स्तर सुधरे। इसके लिए उन्होंने भूजल विभाग से ठोस और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार कराने का आग्रह किया है।
तेरहमोरी बांध की बदहाली बनी बड़ी वजह
पालिका अध्यक्ष ने तेरहमोरी बांध की खराब स्थिति को भूजल संकट का बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि पहले यह बांध क्षेत्र में भूजल स्तर को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था, लेकिन गेट क्षतिग्रस्त और असंचालित होने के बाद हालात लगातार बिगड़ते गए। अब स्थिति यह है कि कई इलाकों में हैंडपंप तक सूख चुके हैं।
उन्होंने बताया कि तेरहमोरी बांध उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के तृतीय मंडल के अधीन लोअर खंड के अधिशासी अभियंता के प्रबंधन में है। उनसे क्षतिग्रस्त गेटों की मरम्मत के लिए तत्काल एस्टीमेट तैयार कर शासन से बजट स्वीकृत कराने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है।
मानसून में जलभराव से सुधरती थी स्थिति
नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि क्षेत्र में गर्म हवाएं पहले भी चलती थीं, लेकिन जब तक मानसून के दौरान तेरहमोरी बांध में पानी का ठहराव रहता था, तब तक भूजल स्तर संतोषजनक बना रहता था। उस समय शहर के अधिकांश हैंडपंप चालू रहते थे और लगाए गए पौधे भी सफलतापूर्वक विकसित होते थे। वर्तमान में हालात इसके विपरीत हो चुके हैं और क्षेत्र सूखाग्रस्त स्थिति की ओर बढ़ रहा है।
रबी बुवाई तक पानी रोकने की मांग
पालिका अध्यक्ष ने मांग की है कि तेरहमोरी बांध में जलभराव सुनिश्चित कर रबी फसल की बुवाई तक पानी का ठहराव बनाए रखा जाए, ताकि भूजल स्तर में वास्तविक सुधार हो सके। आवश्यकता पड़ने पर जिलाधिकारी के माध्यम से शासन स्तर पर भी पत्राचार किए जाने की बात कही गई है। उन्होंने यह भी बताया कि तेरहमोरी बांध विश्व धरोहर फतेहपुर सीकरी स्मारक समूह से जुड़े बांध के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) आगरा सर्किल की सूची में दर्ज है।
प्रबुद्धजनों ने भी मरम्मत की मांग का किया समर्थन
सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के सचिव अनिल शर्मा ने भी पालिका अध्यक्ष की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर कई प्रबुद्धजनों से चर्चा की गई, जिनमें पाराशर, पूर्व पालिका अध्यक्ष इस्लाम, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र शुक्ला, डाबर गांव के पूर्व प्रधान धर्म सिंह माहुरा और असलम सलीमी शामिल हैं। सभी का मत है कि भरतपुर (राजस्थान) के अजान बांध के डाउन कैचमेंट और फतेहपुर सीकरी रिज एरिया से पर्याप्त पानी तेरहमोरी बांध तक पहुंचता है, लेकिन संरचनात्मक खामियों के कारण जलराशि रुक नहीं पाती और बह जाती है।

