आगरा:  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का आगरा शहर से गहरा और ऐतिहासिक संबंध रहा है। बापू ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आगरा का दौरा किया, बल्कि इस शहर को अपने विचारों और संदेशों से प्रेरित भी किया। उनकी दो प्रमुख यात्राओं—1920 और 1929—के साथ-साथ 1938 की संभावित तीसरी यात्रा और 1944 में आगरा कैंट स्टेशन पर लिया गया ऐतिहासिक साक्षात्कार आज भी इतिहास के पन्नों में जीवंत है।

23 नवंबर 1920 को महात्मा गांधी पहली बार आगरा पहुंचे। वह मौलाना शौकत अली के साथ स्वतंत्रता संग्राम को गति देने और जनता को एकजुट करने के मिशन पर थे। बेलनगंज में वकील गिरधारीलाल के आवास पर ठहरने के दौरान उन्होंने पालीवाल पार्क (तब व्हीवेट पार्क) में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। मौलाना आजाद की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में गांधी जी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड का जिक्र करते हुए गहरी वेदना व्यक्त की। उन्होंने अपने लेख, जो  6 अक्टूबर 1920 के अंक में प्रकाशित हुआ था, को पढ़कर सुनाया।

इस सभा में गांधी जी ने अनुशासनहीनता और जुलूसों में सजावट की प्रवृत्ति की कड़ी निंदा की। उनके भाषण ने आगरा के लोगों पर गहरा प्रभाव डाला और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति जनता में उत्साह जगा।

दूसरी यात्रा: 1929 में स्वास्थ्य लाभ और प्रेरणादायक संदेश

11 सितंबर 1929 को गांधी जी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते आगरा आए। इस बार वह यमुना नदी के किनारे, एत्माउदौला स्मारक के पास बृजमोहन दास मेहरा की बगीची में रुके। उनके साथ कस्तूरबा गांधी, आचार्य कृपलानी, मीरा बहन, और जयप्रकाश नारायण की पत्नी प्रभावती भी थीं। आगरा के प्रसिद्ध वैद्य से परामर्श लेने के साथ-साथ उन्होंने पेट दर्द के उपचार के लिए यमुना किनारे के कुएं का पानी पिया।

इस प्रवास के दौरान गांधी जी ने पालीवाल पार्क में एक और जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने असहयोग आंदोलन की शक्ति पर विश्वास जताया और खादी के उपयोग, विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार, मादक पदार्थों के निषेध, और अस्पृश्यता के उन्मूलन का आह्वान किया। उनके संदेश ने शहरवासियों को सामाजिक सुधार और स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित किया।

बृथला कुष्ठ आश्रम का दौरा

1929 की यात्रा के दौरान गांधी जी ने खेरागढ़ तहसील के सैंया ब्लॉक में इरादत नगर के पास बृथला गांव का दौरा किया। यहां देश का पहला कुष्ठ आश्रम संचालित था। वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना के अनुसार, गांधी जी ने इस आश्रम का भ्रमण किया और वहां स्थापित लीला विलास कुंड (वृथला कुंड) को भी देखा। यह दौरा उनकी सामाजिक समावेशिता और मानव सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

तीसरी यात्रा: 1938 में छात्रों से मुलाकात

कुछ ऐतिहासिक स्रोतों में 1938 में गांधी जी की तीसरी आगरा यात्रा का जिक्र मिलता है। इस दौरान उन्होंने आगरा के छात्रों से मुलाकात की और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, इस यात्रा के बारे में विस्तृत जानकारी सीमित है।

ऐतिहासिक साक्षात्कार: 1944 में आगरा कैंट स्टेशन

17 जुलाई 1944 को गांधी जी शिमला से वर्धा जाते समय वायसराय की विशेष ट्रेन में आगरा कैंट स्टेशन पर रुके। इस दौरान कम्युनिस्ट नेता महादेव नारायण टंडन ने स्टेशन के विश्रामालय में उनका साक्षात्कार लिया। इस इंटरव्यू को पूरी तरह गुप्त रखा गया था, लेकिन टंडन को ट्रेड यूनियन नेता होने के नाते इसकी जानकारी मिली। यह साक्षात्कार लोकयुद्ध (हिंदुस्तानी कम्युनिस्ट पार्टी का साप्ताहिक पत्र) में 5 अगस्त 1945 को प्रकाशित हुआ। बाद में इसे गांधी शांति सेंटर, दिल्ली से दोबारा प्रकाशित किया गया। प्रख्यात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जे.एन. टंडन के अनुसार, इस साक्षात्कार की देशभर में खूब चर्चा हुई थी।

आगरा पर गांधी जी का प्रभाव

गांधी जी की आगरा यात्राओं ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम को गति दी, बल्कि सामाजिक सुधारों और स्वदेशी आंदोलन को भी बढ़ावा दिया। उनकी सादगी, अनुशासन और मानवता के प्रति समर्पण ने आगरा के लोगों को गहरे तक प्रभावित किया। आज भी पालीवाल पार्क, बृथला कुष्ठ आश्रम, और यमुना किनारे की उनकी स्मृतियां शहरवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

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