महंत एकनाथ ने कहा कि एक ओर देश में हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर सनातन एकता यात्रा निकाली जा रही है और नारे दिए जा रहे हैं कि “जाति-पात की करो विदाई, हिंदू-हिंदू भाई-भाई”लेकिन दूसरी ओर संविधान की सीमाओं से बाहर जाकर ऐसे कार्य हो रहे हैं, जो भारत की एकता को मजबूत करने के बजाय कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन यात्राओं से वास्तव में हिंदुओं को उनका अधिकार मिलेगा या यह सिर्फ एक भावनात्मक लहर बनाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश है? महंत महाराज ने कहा कि “जाति रहेगी या नहीं, यह मुद्दा नहीं। असली समस्या है जाति का अहंकार, जो आज हर धर्म, हर समुदाय और हर मनुष्य में कूट-कूटकर भरा है।”
उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से भारत 1947 में ही हिंदू राष्ट्र बन चुका था, लेकिन वर्षों की राजनीति, संविधान में छेड़छाड़ और ‘सेक्युलर’ शब्द ने इसे विवादित बना दिया।
एकनाथ महाराज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 70 साल में संविधान के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की। ‘सेक्युलर’ शब्द इसी का परिणाम है और यही कारण है कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने में बाधाएँ खड़ी हो रही हैं।”महंत एकनाथ ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भारत वस्तुस्थिति में हिंदू राष्ट्र है, चाहे इसे लिखित रूप में घोषित न किया गया हो।
अंत में उन्होंने देश में धार्मिक धुवीकरण की बजाय मानव यात्रा निकालने की अपील की, जो लोगों में मानवता, दया, एकता और करुणा का भाव जगाए।

शिवेश शुक्ला मंडल ब्यूरो चीफ, बस्ती (जिला नज़र सोशल & प्रिंट मीडिया न्यूज़ नेटवर्क) शिवेश शुक्ला एक प्रतिबद्ध और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पत्रकारिता में 10 वर्षों की दक्षता रखते हैं। बीते 5 वर्षों से 'जिला नज़र' में मंडल ब्यूरो चीफ पद पर कार्यरत हैं, वे निर्भीकता और निष्पक्षता के साथ जनसरोकार से जुड़ी खबरों की मुखर आवाज बने हुए हैं।

error: Content is protected !!
Exit mobile version