गुरसरांय/झांसी: गुरसरांय के तालाब माता मंदिर परिसर में गुरुवार को सवर्ण समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें यूजीसी बिल को ‘काला कानून’ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया गया। बैठक में तहसील गरौठा क्षेत्र के समस्त सवर्ण समाज संगठनों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह कानून समाज को बांटने का कार्य कर रहा है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। सभी संगठनों ने एकजुट होकर बिल का विरोध करने का आवाहन किया।

बैठक में उपस्थित लोगों ने स्पष्ट किया कि उनका किसी जाति या वर्ग से विरोध नहीं है, बल्कि इस ‘सवर्ण विरोधी कानून’ से है, जिसमें सवर्णों को सीधा गुनाहगार घोषित कर दिया गया है। वक्ताओं ने कहा कि यदि बिल वापस नहीं लिया गया तो आज की बैठक कल सड़कों पर उतरकर आंदोलन का रूप ले लेगी और सरकार को कानून वापस लेने के लिए मजबूर किया जाएगा। बिल को आने वाली पीढ़ी के लिए घातक बताते हुए ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समाज को एकजुट होकर विरोध करने का आह्वान किया गया।

बैठक के प्रमुख फैसले और अपील:

  • ज्ञापन सौंपना: 31 जनवरी को यूजीसी बिल के विरोध में उपजिलाधिकारी गरौठा को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा।
  • एकत्रित होने का समय: सभी लोग 31 जनवरी को सुबह 11:00 बजे तालाब माता मंदिर पर एकत्रित होंगे और वहां से गरौठा के लिए प्रस्थान करेंगे।
  • संघर्ष की तैयारी: सवर्ण समाज अब इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है और समाज के अधिकारों के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।
  • संदेश: बिल समाज को बांटने वाला और सवर्णों के खिलाफ है, जिसका पुरजोर विरोध जरूरी है।

बैठक में सभी सवर्ण समाज के लोग उपस्थित रहे और एकजुटता का संदेश दिया। यह आयोजन यूजीसी बिल के खिलाफ बढ़ते विरोध को दर्शाता है, जहां सवर्ण समाज इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ मान रहा है। आगे 31 जनवरी का ज्ञापन आंदोलन की दिशा तय कर सकता है।

  • रिपोर्ट – रोहित साहू

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