हरदोई: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के बिलग्राम थाने में एक ऐसी घटना घटी है, जो न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की पोल भी खोल देती है। स्थानीय पत्रकार नेहा दीक्षित और उनके सहयोगी राकेश कुमार (रफ्तार मीडिया ब्यूरो चीफ) को एक दहेज हत्याकांड की खबर कवर करने के दौरान पुलिसकर्मियों ने अमानवीय व्यवहार किया। धमकियां, मारपीट, गाली-गलौज और जबरन हिरासत—यह सब एक महिला पत्रकार के साथ हुआ, जो CCTV में कैद होने के बावजूद न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, DGP और अन्य उच्च अधिकारियों से तत्काल जांच व दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

दहेज हत्याकांड: जहां न्याय की शुरुआत ही रुक गई

यह घटना एक संवेदनशील दहेज हत्याकांड से जुड़ी है। 13 नवंबर 2025 की रात्रि को बिलग्राम क्षेत्र में एक विवाहित महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पीड़िता के माता-पिता ने इसे दहेज उत्पीड़न से जोड़ते हुए 14 से 20 नवंबर तक थाने के चक्कर लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। न FIR दर्ज हुई, न जांच शुरू। पीड़ित परिवार की न्याय की गुहार मीडिया तक पहुंची, जहां नेहा दीक्षित और राकेश कुमार ने हस्तक्षेप किया।

पुलिस अधीक्षक हरदोई (अशोक कुमार मीणा) के निर्देश पर 20 नवंबर को अंततः FIR नंबर 575/25 दर्ज हुई। लेकिन इसके बाद भी कोई प्रगति नहीं—न गिरफ्तारी, न पूछताछ, न जांच। उल्टा, पुलिस ने पीड़ित परिवार और पत्रकारों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। यह निष्क्रियता न केवल पीड़िता के परिवार को न्याय से वंचित कर रही है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल उठाती है।

CO के दफ्तर से थाने तक: धमकी से मारपीट तक का सिलसिला

घटना का टर्निंग पॉइंट 1 दिसंबर को आया, जब राकेश कुमार ने CO बिलग्राम (रवि प्रकाश सिंह) से बाइट लेने का प्रयास किया। CO ने अगले दिन सुबह 11 बजे अपने ऑफिस बुलाया। वहां पहुंचते ही:

  • कांस्टेबल ने पत्रकारों के मोबाइल छीन लिए।
  • CO ने धमकी दी, “तुम्हारे खिलाफ शाहाबाद कोतवाली में मुकदमा लिखा गया है, यहां भी लिखवा देंगे। बाहर निकल जाओ।”

ऑफिस से बाहर निकलने के बाद पीड़िता परिवार का बयान रिकॉर्ड करते ही बिलग्राम थाने की SHO की गाड़ी पहुंची। अचानक पुलिसकर्मियों ने हमला बोल दिया:

  • नेहा दीक्षित को बिना महिला कांस्टेबल के जबरन गाड़ी में बिठाया गया।
  • थाने ले जाकर अशोभनीय गालियां दी गईं, धक्का-मुक्की की गई।
  • नेहा को गंभीर चोटें आईं, जबकि राकेश कुमार को महिला डेस्क में बुरी तरह पीटा गया।
  • थाने के पीछे 5-7 पुलिसकर्मियों ने मिलकर बर्बरता की, जो कथित तौर पर CCTV में कैद है।

यह व्यवहार न केवल हिंसक था, बल्कि एक महिला पत्रकार के सम्मान पर सीधा प्रहार। नेहा दीक्षित ने अपनी अपील में कहा, “सरकार महिला सुरक्षा और पत्रकार सुरक्षा की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। यह चौथे स्तंभ पर हमला है।”

प्रभाव: पत्रकारिता पर खतरा, न्याय की आस बाकी

यह घटना हरदोई की पत्रकारिता जगत में सनसनी फैला रही है। नेहा दीक्षित, जो स्थानीय स्तर पर सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हैं, ने 2027 विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान भी किया है। लेकिन इस अत्याचार ने न केवल उनकी हिम्मत तोड़ी, बल्कि पूरे मीडिया को डराने का संदेश दिया। पीड़ित परिवार अब भी न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है, जबकि आरोपी खुले घूम रहे हैं।

अपील और मांगें: उच्च स्तरीय जांच की जरूरत

पीड़ित पत्रकारों ने CMO, DGP, IG, ADG और गृह सचिव को पत्र लिखा है। मुख्य मांगें:

  1. पूरे प्रकरण की उच्च-स्तरीय जांच।
  2. CO रवि प्रकाश सिंह और शामिल पुलिसकर्मियों का निलंबन व विभागीय कार्रवाई।
  3. CCTV फुटेज की जांच से सत्य उजागर।
  4. महिला आयोग और मीडिया सेल से संज्ञान।

हरदोई पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन यह मामला अगर जल्द सुलझा नहीं, तो यह उत्तर प्रदेश की ‘मिशन शक्ति’ और ‘महिला सशक्तिकरण’ की बड़ी विडंबना साबित होगा। समाज और मीडिया इस घटना पर नजर रखे हुए हैं—क्या न्याय मिलेगा, या यह एक और दबा दिया जाने वाला केस बन जाएगा?

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