आगरा: आगरा के चर्चित अवैध शस्त्र लाइसेंस घोटाले की जांच कर रही स्पेशल टास्क फोर्स (STF) अभी तक बड़े खुलासे से दूर नजर आ रही है। न तो कोई बड़ी गिरफ्तारी हुई है और न ही ऐसे ठोस सबूत सामने आए हैं जो पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर सकें। उल्टा, केस से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलों के गायब होने से जांच पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, STF ने कलक्ट्रेट स्थित शस्त्र कार्यालय से कई बार केस संबंधित फाइलें मांगी हैं और औपचारिक नोटिस भी जारी किए, लेकिन अब तक कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों की मिलीभगत से ये फाइलें गायब करवा दी गईं ताकि जांच कमजोर हो सके। यह मामला पहले से ही फर्जी लाइसेंस और अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त से जुड़ा है, जहां कई रसूखदार लोग शामिल बताए जा रहे हैं।

मुख्य आरोपियों को राहत मामले के मुख्य आरोपी ज़ैद और अरशद की जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन अदालत ने इसे टालकर अगली तारीख 2 फरवरी 2026 तय कर दी। सुनवाई में मुकदमा वादी इंस्पेक्टर यतीन्द्र और विवेचक शैलेंद्र मौजूद रहे, लेकिन STF की ओर से निर्णायक दस्तावेज पेश नहीं हो सके, जिससे आरोपियों को अंतरिम राहत मिल गई।

सूत्र बताते हैं कि 2 फरवरी को STF कुछ अहम कागजात अदालत में दाखिल कर सकती है, जिससे केस की दिशा बदल सकती है। जांच के दायरे में एफआईआर में नामजद आरोपियों के अलावा आधा दर्जन अन्य लोग भी हैं। संकेत मिल रहे हैं कि इस घोटाले में कई सफेदपोश और रसूखदार लोग STF के रडार पर हैं। उनके नाम सामने आने पर बड़ा खुलासा संभव है।

यह घोटाला आगरा में पिछले साल से चर्चा में है, जहां फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाकर अवैध हथियार खरीदे गए। STF की जांच में देरी और फाइलों के गायब होने से सिस्टम में साजिश की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर लोग जांच में तेजी और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

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