आगरा। केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बने कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन कर दिए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 10 फरवरी 2026 को गजट नोटिफिकेशन जारी किया, जो 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे। इन नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर AI से बने फोटो, वीडियो या ऑडियो पर साफ-साफ लेबल लगाना जरूरी होगा।
मुख्य प्रावधान क्या हैं?
सिंथेटिक जनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI) की परिभाषा: नियमों में ‘सिंथेटिक रूप से निर्मित सूचना’ को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें वो ऑडियो, विजुअल या ऑडियो-विजुअल कंटेंट शामिल है जो कंप्यूटर या एल्गोरिदम से बनाया या बदला गया हो, लेकिन असली लगे। रूटीन एडिटिंग (जैसे कलर करेक्शन, नॉइज रिडक्शन), डॉक्यूमेंट क्रिएशन या एक्सेसिबिलिटी फीचर्स को इससे बाहर रखा गया है।
🔹लेबलिंग अनिवार्य: सभी प्लेटफॉर्म्स को वैध AI कंटेंट पर प्रमुखता से लेबल लगाना होगा। विजुअल कंटेंट में साफ दिखने वाला मार्कर, ऑडियो में शुरुआत में डिस्क्लोजर और परमानेंट मेटाडेटा (यूनिक आइडेंटिफायर) शामिल करना जरूरी है। लेबल को छुपाया या हटाया नहीं जा सकेगा।
🔹यूजर्स की जिम्मेदारी: कंटेंट अपलोड करते समय यूजर्स को घोषणा करनी होगी कि वह AI से बना है या नहीं। बड़े प्लेटफॉर्म्स (5 मिलियन से ज्यादा यूजर्स वाले) को यूजर की घोषणा के साथ टेक्निकल वेरिफिकेशन भी करना होगा।
3 घंटे में हटाना: गैरकानूनी या भ्रामक AI कंटेंट (जैसे डीपफेक, नॉन-कंसेंसुअल इमेजरी) को सरकारी आदेश या कोर्ट ऑर्डर पर 3 घंटे के अंदर हटाना होगा (पहले 36 घंटे थे)। कुछ संवेदनशील मामलों (जैसे चाइल्ड एक्सप्लॉइटेशन या फेक डॉक्यूमेंट) में प्लेटफॉर्म्स को स्वचालित टूल्स से रोकथाम करनी होगी।
प्लेटफॉर्म्स पर क्या असर पड़ेगा?
इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक, एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स को अपलोड प्रोसेस बदलना पड़ेगा। अब यूजर्स से AI यूज की डिटेल्स लेनी होंगी और टेक्निकल चेक भी करना होगा। इससे डीपफेक और फेक न्यूज पर लगाम लगेगी, लेकिन क्रिएटर्स और प्लेटफॉर्म्स के लिए कंप्लायंस का बोझ बढ़ेगा।
क्यों लाए गए ये नियम?
AI टूल्स के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल से डीपफेक,
मिसइनफॉर्मेशन और प्राइवेसी उल्लंघन के मामले बढ़े हैं। सरकार का कहना है कि ये बदलाव इंटरनेट को सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर प्लेटफॉर्म्स की सेफ हार्बर (लीगल प्रोटेक्शन) खत्म हो सकती है और यूजर्स पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
ये नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे। क्रिएटर्स, यूजर्स और प्लेटफॉर्म्स को अब से तैयार रहना चाहिए।


