फिरोजाबाद: आजादी के अमृत महोत्सव में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने पूरे देश में जोश भरा था, लेकिन फिरोजाबाद की इन 60 महिलाओं के लिए यह अभियान अब कर्ज और परेशानी का सबब बन गया है। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) के तहत 30 स्वयं सहायता समूहों (करीब 60 महिलाएं) को 1 अगस्त 2025 को 1,46,500 तिरंगा झंडे बनाने का ऑर्डर मिला था।

इन महिलाओं ने दिन-रात एक कर कच्चा माल उधार पर लिया, बैंक से लोन उठाया और समय पर सभी झंडे सप्लाई कर दिए। डूडा विभाग और नगर निगम ने कच्चे माल के लिए 50% एडवांस (करीब 14.65 लाख रुपये) दिया, लेकिन बाकी 14.65 लाख रुपये का भुगतान आज तक नहीं हुआ। प्रति झंडा 20 रुपये तय थे, कुल बिल 29.30 लाख रुपये का बना था। विभाग ने वादा किया था कि सप्लाई के 15 दिनों में बाकी राशि मिल जाएगी, लेकिन छह महीने बीत चुके हैं – फाइलें अभी भी दफ्तरों में अटकी हुई हैं।

विभव नगर स्थित शिव स्वयं सहायता समूह की संचालिका ने शासन को पत्र लिखकर अपनी व्यथा रखी है। उन्होंने कहा, “बकाया न मिलने से बैंक लोन पर ब्याज लगातार बढ़ रहा है। हमारी मेहनत का फल हमें नहीं मिल रहा, बल्कि हम कर्जदार हो गए हैं।”

समूह की अन्य सदस्याएं आदि ने बताया, “हमने सोचा था सरकारी योजना से आत्मनिर्भर बनेंगी, लेकिन अब कई समूह तालाबंदी की कगार पर हैं। परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।”

शहर मिशन प्रबंधक सपना जोशी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “स्वयं सहायता समूहों के बाकी भुगतान की राशि मुख्यालय से अभी प्राप्त नहीं हुई है। महिलाओं की परेशानी का पूरा अहसास है। हम जल्द से जल्द भुगतान कराने की कोशिश कर रहे हैं।”

यह मामला सरकारी योजनाओं की धीमी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ‘हर घर तिरंगा’ जैसे राष्ट्रवादी अभियान में महिलाओं को जोड़कर स्वरोजगार देने का दावा किया गया था, लेकिन पेमेंट में देरी से उनका संघर्ष बढ़ गया है।

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