आगरा: आगरा साइबर क्राइम पुलिस ने एक शातिर साइबर ठग को धर दबोचा है, जिसने आईपीओ और स्टॉक मार्केट में निवेश कर मोटा मुनाफा दिलाने का लालच देकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी की। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मेरठ निवासी काशिफ पुत्र आसिफ के रूप में हुई है। पुलिस ने इस गिरोह द्वारा अब तक करीब 18 लाख 50 हजार रुपये की साइबर धोखाधड़ी की पुष्टि की है। यह कार्रवाई एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर दर्ज शिकायतों के आधार पर हुई है।

ठगी का तरीका

  • आरोपी सोशल मीडिया, टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय था।
  • लोगों को आईपीओ आवंटन, शेयर बाजार में हाई रिटर्न और सुरक्षित निवेश का झांसा दिया जाता था।
  • विश्वास जीतने के बाद पीड़ितों से निवेश के नाम पर रकम फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई जाती थी।
  • जांच में सामने आया कि ठग फर्जी फर्म्स और मल्टीपल बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती थी।

पुलिस की कार्रवाई

  • एनसीआरपी पोर्टल पर कुल 18 ऑनलाइन शिकायतें दर्ज थीं, जिनकी जांच के बाद साइबर क्राइम थाना, पुलिस कमिश्नरेट आगरा ने तकनीकी साक्ष्यों (कॉल डिटेल्स, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, आईपी ट्रेसिंग आदि) के आधार पर आरोपी को चिन्हित किया।
  • काशिफ को गिरफ्तार कर लिया गया।
  • उसके कब्जे से ठगी में प्रयुक्त बैंक खाते, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए।
  • फिलहाल पूछताछ जारी है – पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं। संभवतः गिरोह बड़ा हो सकता है, क्योंकि साइबर फ्रॉड में ऐसे केस अक्सर इंटरस्टेट या इंटरनेशनल होते हैं।

बढ़ती साइबर ठगी पर चेतावनी

आगरा में पिछले कुछ महीनों में आईपीओ, क्रिप्टो, स्टॉक इन्वेस्टमेंट और हाई रिटर्न स्कीम्स के नाम पर ठगी के कई मामले सामने आए हैं। पुलिस की अपील:

  • ऑनलाइन निवेश से पहले हमेशा SEBI रजिस्टर्ड ब्रोकर/प्लेटफॉर्म की जांच करें।
  • कोई भी अनजान व्यक्ति/ग्रुप हाई रिटर्न का वादा करे तो संदेह करें – बैंक कभी फोन पर OTP या डिटेल्स नहीं मांगते।
  • संदिग्ध कॉल/मैसेज आए तो तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।
  • छोटी रकम से शुरू कर “प्रॉफिट” दिखाने वाली स्कीम्स से सावधान रहें – ये ज्यादातर पोंजी स्कीम होती हैं।

यह गिरफ्तारी आगरा साइबर क्राइम यूनिट की सक्रियता का एक और उदाहरण है, जहां 2025-26 में साइबर फ्रॉड के खिलाफ दर्जनों गिरफ्तारियां हुई हैं। पीड़ितों को जल्द रिफंड और न्याय मिले, यही उम्मीद है।

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