बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में सर्व शिक्षा अभियान के तहत गरीब बच्चों के लिए मुफ्त बांटी जाने वाली सरकारी किताबों को कबाड़ में बेचने का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर BJP सरकार पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया है, जबकि प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई कर्मचारियों पर सख्त एक्शन लिया है।

कांग्रेस का तीखा हमला

कांग्रेस ने X (पूर्व ट्विटर) पर वीडियो पोस्ट कर लिखा: “यूपी में भ्रष्टाचार का आलम देखिए! बहराइच में बच्चों को बांटने के लिए आईं करीब 16,000 किताबों को ₹4 किलो में कबाड़ी को बेच दिया गया। साफ है कि BJP के राज में शिक्षा का सौदा किया जा रहा है। फंडा साफ है – बच्चे भले न पढ़ें, बस BJP की तिजोरी में माल बढ़े।” पार्टी ने आरोप लगाया कि किताबें ट्रक में लादकर उत्तराखंड भेजी जा रही थीं, जो राज्य में शिक्षा व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़े करता है। यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है और विपक्षी नेता इसे BJP की ‘शिक्षा विरोधी नीति’ से जोड़ रहे हैं।

प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने 17 फरवरी को टिप-ऑफ मिलने पर तुरंत 5 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। रिपोर्ट में स्टॉक से हजारों किताबें गायब पाई गईं – कुल 13,082 से 15,593 किताबें (2026-27 सत्र की) नदारद बताई गईं। रामगांव थाना पुलिस ने कबाड़ी दिलशाद अली के गोदाम से ट्रक (UP21 FT 8485) जब्त किया, जिसमें किताबें उत्तराखंड के काशीपुर भेजी जा रही थीं। पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया – BSA कार्यालय का अनुचर आलोक मिश्रा (मास्टरमाइंड), दिलशाद अली, शुभांकर गुप्ता और अर्जुन। एक आरोपी समीर अहमद फरार है। आरोपियों पर सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम और BNS की धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

विभागीय एक्शन DM के आदेश पर –

  • 3 कर्मचारियों को तत्काल बर्खास्त किया गया।
  • 2 अनुचरों को निलंबित किया गया।
  • 3 उच्च अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर शासन को विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भेजी गई।

जांच में सामने आया कि BSA दफ्तर के भीतर से ही साजिश रची गई। कुछ लोगों ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उगाही की कोशिश की, इस एंगल पर भी जांच चल रही है।

क्या है पूरा मामला? सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों के लिए नई किताबें आईं, लेकिन विभाग के कुछ भ्रष्ट तत्वों ने कबाड़ियों से सांठगांठ कर उन्हें ₹4 प्रति किलो के भाव बेच दिया। 17 फरवरी को वीडियो वायरल होने के बाद मामला उजागर हुआ। यह घटना गरीब बच्चों के शिक्षा अधिकार पर डाका है और यूपी में शिक्षा व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े कर रही है।

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