आगरा: जिले में एक वरिष्ठ अधिवक्ता की आधार कार्ड में जन्मतिथि अपडेट (DOB correction) के लिए जन सेवा केंद्र (CSC/आधार जन सेवा केंद्र) पर हुई परेशानी ने तूल पकड़ लिया है। अधिवक्ता ने केंद्र संचालक द्वारा 73 साल पुराना जन्म प्रमाण पत्र (1953 का) मांगने और अभद्र/रूखे व्यवहार से आहत होकर जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) आगरा को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। मामला काफी चर्चा में है, क्योंकि यह आम जनता की आधार अपडेट की दिक्कतों को उजागर करता है।

घटना का पूरा विवरण

  • अधिवक्ता का नाम: रमाशंकर शर्मा (वरिष्ठ अधिवक्ता, आगरा)।
  • जन्म तिथि: 5 मार्च 1953 (अभी 73 वर्ष की उम्र)।
  • समस्या: आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधारने के लिए जन सेवा केंद्र गए। केंद्र संचालक ने 73 साल पुराना जन्म प्रमाण पत्र (1953 का मूल या प्रमाणित कॉपी) मांगा, जो असंभव जैसा है क्योंकि इतने पुराने प्रमाण पत्र ज्यादातर लोगों के पास नहीं होते (खासकर ग्रामीण/पुराने रिकॉर्ड्स में)।
  • व्यवहार: अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि संचालक ने रूखा/अभद्र व्यवहार किया, बात नहीं सुनी, और बिना मदद किए लौटा दिया।
  • गुहार: आहत होकर अधिवक्ता ने डीएम आगरा को पत्र लिखा – “डीएम साहब, आप ही बनवा दें 1953 का जन्म प्रमाण पत्र!” पत्र में केंद्र संचालकों की मनमानी, दस्तावेजों की अनावश्यक मांग और बुजुर्गों/वरिष्ठ नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार का जिक्र है। उन्होंने डीएम से हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की मांग की।
  • बैकग्राउंड: हाल के नियमों (2025-26) में आधार को DOB प्रूफ के रूप में कई जगहों (वोटर आईडी, SSC, रेलवे आदि) से हटाया गया है। UP/महाराष्ट्र सरकारों ने सख्त निर्देश दिए कि DOB के लिए जन्म प्रमाण पत्र जरूरी है। इससे लाखों बुजुर्गों को पुराने जन्म प्रमाण पत्र बनाने/सुधारने की दिक्कत हो रही है। UIDAI नियमों में भी DOB अपडेट के लिए जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल सर्टिफिकेट या शपथ पत्र जैसे विकल्प हैं, लेकिन CSC पर अक्सर सख्ती बरती जाती है।

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