आगरा। सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के आरोपों की फेहरिस्त में अब जिला प्रोबेशन कार्यालय भी जुड़ गया है। यहां निर्माण कार्य और सामग्री खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा अनिवार्य GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल की प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज कर चहेती फर्मों को ठेके और खरीद दिए गए। बाजार मूल्य से कहीं अधिक दरों पर फर्नीचर, अन्य सामग्री और निर्माण कार्य कराए गए, जिससे सरकारी खजाने को लाखों का नुकसान हुआ।
मुख्य आरोप क्या हैं?
- GeM पोर्टल के बजाय निजी स्तर पर फर्मों का चयन और खरीद।
- एक से छह लाख रुपये तक के कथित फर्जी/ओवर-इनवॉइस्ड बिल बनाकर भुगतान।
- बाजार दर से ज्यादा कीमत पर सामग्री खरीद (ओवर-प्राइसिंग)।
- पूर्व आउटसोर्स कर्मचारियों एवं उनके परिजनों की फर्मों को प्राथमिकता से काम।
- एक ही पते से जुड़े अलग-अलग GST नंबर वाली फर्मों को लाभ पहुंचाना।
- शिकायतों को दबाने या छिपाने का प्रयास।
ये अनियमितताएं सरकारी योजनाओं जैसे कन्या सुमंगला योजना, बाल सेवा योजना और मिशन शक्ति के मदों में भी हुईं बताई जा रही हैं। जुलाई 2025 में जिला प्रोबेशन अधिकारी के पद पर तैनात अतुल कुमार सोनी के कार्यकाल में ये खरीद और निर्माण कार्य हुए।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया:
जिला प्रोबेशन अधिकारी अतुल कुमार सोनी ने सभी आरोपों को बेबुनियाद और निराधार करार दिया। उन्होंने कहा, “विभाग द्वारा हर खरीद शासन के निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार की गई है। जांच में सच्चाई खुद सामने आ जाएगी।”
वहीं, आगरा के जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश जारी किए हैं। DM ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी निष्पक्ष होगी और यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी – इसमें विभागीय जांच से लेकर FIR तक शामिल हो सकती है।
GeM पोर्टल केंद्र सरकार की प्रमुख ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म है, जो सरकारी खरीद को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाती है। नियमों के मुताबिक, कुछ सीमा से ऊपर की खरीद GeM से अनिवार्य है। ऐसे मामलों में अनियमितता पाए जाने पर विभागीय जांच के साथ Vigilance या ACB जांच भी हो सकती है।

