आगरा। यमुना नदी को प्रदूषणमुक्त रखने और घाटों पर अवैध गतिविधियां रोकने के अभियान के दौरान नगर निगम की प्रवर्तन टीम पर हमला हो गया। बल्केश्वर घाट के पास बुधवार को टीम ने यमुना में कई भैंसें देखीं तो पशुपालकों को जानवर निकालने के निर्देश दिए। शुरुआत में पशुपालकों ने भैंसें बाहर निकाल लीं, लेकिन कुछ ही देर बाद दर्जनों लोग मौके पर जमा हो गए। टीम के साथ कहासुनी के बाद अचानक पथराव शुरू हो गया।
टीम में शामिल सुखवीर सिंह, हवलदार डीपी सिंह और चालक बंटी पर पथराव हुआ। बंटी के सिर में पत्थर लगने से गंभीर चोट आई, खून बहने लगा। स्थिति बिगड़ती देख बाकी सदस्य किसी तरह मौके से हटकर अपनी जान बचाई। घायल बंटी को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक मेडिकल के बाद उसे उपाध्याय नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उसकी हालत को गंभीर बताया है।
नगर निगम प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। थाना कमलानगर में चार लोगों – फरमान, पप्पू, गुलफाम और चुटिया – को नामजद कर तहरीर दी गई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पथराव करने वालों की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी और गवाहों के बयान लिए जा रहे हैं।
पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि यमुना में पशुओं को नहलाने से नदी प्रदूषित होती है और घाटों पर गंदगी फैलती है। अभियान लगातार चलेगा, और ऐसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई होगी। नगर निगम कर्मचारियों में रोष है – वे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मामले की पृष्ठभूमि:
आगरा में यमुना नदी में पशुओं (खासकर भैंसों) को नहलाने की समस्या पुरानी है। इससे नदी प्रदूषित होती है और घाटों पर गंदगी फैलती है। नगर निगम समय-समय पर अभियान चलाता है, जिसमें पशुओं को पकड़कर जुर्माना वसूला जाता है या जब्त किया जाता है। लेकिन पशुपालकों के विरोध से अक्सर विवाद हो जाता है। हाल के वर्षों में भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां टीम पर हमला हुआ या पशु छुड़ाने की कोशिश हुई। सुप्रीम कोर्ट और NGT ने भी यमुना प्रदूषण पर आगरा नगर निगम पर जुर्माना लगाया है, जिससे अभियान तेज हुए हैं।

