आगरा: अवैध शस्त्र लाइसेंस और हथियारों के सप्लाई नेटवर्क से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में नामजद प्रमुख आरोपी मोहम्मद जैद और अरशद ने आगरा की अदालत में जमानत के लिए याचिका दायर की है। मोहम्मद जैद की ओर से अधिवक्ता अवधेश शर्मा ने, जबकि अरशद की ओर से अधिवक्ता बृजेश कुमार सिंह ने आवेदन प्रस्तुत किया। दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत (स्टे) को खारिज किए जाने के बाद निचली अदालत में सुनवाई की गति तेज हुई। अब तक 7 जनवरी और 14 जनवरी को सुनवाई हो चुकी है, जबकि 21 जनवरी को निर्णायक सुनवाई प्रस्तावित है।

केस का बैकग्राउंड: नाई की मंडी थाने में दर्ज मुकदमा

यह मामला 2025 में थाना नाई की मंडी क्षेत्र में दर्ज किया गया था। पुलिस और जांच एजेंसियों की विवेचना के दौरान अवैध शस्त्र लाइसेंस जारी कराने और हथियारों की सप्लाई से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के सबूत मिले। STF (स्पेशल टास्क फोर्स) की जांच में मोहम्मद जैद और अरशद को प्रमुख आरोपी माना गया। आरोप है कि दोनों ने फर्जी दस्तावेजों से लाइसेंस प्राप्त किए और हथियारों की अवैध सप्लाई में शामिल थे। इसमें राष्ट्रीय स्तर के शूटर मोहम्मद अरशद का नाम भी जुड़ा, जिन्होंने उम्र फर्जी बताकर लाइसेंस बनवाए।

मोहम्मद जैद के कनेक्शन: माफिया और बिल्डर से लिंक

मोहम्मद जैद के आगरा के एक चर्चित बिल्डर से नजदीकी संबंधों की जांच STF द्वारा की जा रही है। कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी के साथ जैद के कथित लिंक भी जांच के दायरे में हैं। जब माफिया आगरा जेल में बंद था, तब जेल में जन्मदिन मनाने के मामले में जैद और उक्त बिल्डर का नाम सामने आया। पूर्व DGP ने सार्वजनिक रूप से जैद और मुख्तार अंसारी के संबंधों पर टिप्पणी की थी, जिससे केस और संवेदनशील हो गया।

अरशद की दलील: सहयोग और आर्थिक तंगी

जांच शुरू होते ही अरशद ने अपना शस्त्र लाइसेंस सरेंडर कर दिया। जमानत याचिका में उन्होंने आर्थिक तंगी और जांच में सहयोगात्मक रवैये का हवाला दिया। हालांकि, STF रिपोर्ट में अरशद पर फर्जी उम्र दस्तावेजों से कई लाइसेंस प्राप्त करने का आरोप है।

मामले की समयरेखा:

तिथि घटना विवरण
2025 थाना नाई की मंडी में मुकदमा दर्ज; STF जांच शुरू।
दिसंबर 2025 हाईकोर्ट से अंतरिम राहत (स्टे) मिली, बाद में खारिज।
7 जनवरी 2026 अदालत में पहली सुनवाई।
14 जनवरी 2026 दूसरी सुनवाई।
21 जनवरी 2026 निर्णायक सुनवाई; जमानत पर फैसला संभावित।

विश्लेषण: अवैध नेटवर्क पर शिकंजा, लेकिन जमानत की उम्मीद

यह केस उत्तर प्रदेश में अवैध शस्त्र लाइसेंस सिंडिकेट का बड़ा उदाहरण है, जहां फर्जी दस्तावेजों से लाइसेंस बनाए गए। STF ने कई गिरफ्तारियां कीं, लेकिन जैद और अरशद के माफिया लिंक से केस राजनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण। जमानत मिलने पर अन्य संदिग्धों पर असर पड़ सकता है। विपक्ष ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया, जबकि पुलिस इसे ‘संगठित अपराध’ मानती। X पर ट्रेंडिंग: #AgraArmsCase, जहां यूजर्स माफिया कनेक्शन पर बहस कर रहे।

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