“56 लाख परीक्षार्थियों की परेशानी खत्म करने की मांग: आगरा में UP बोर्ड ऑफिस खोलने पर 15 जिलों को फायदा, डॉ. नरवार बोले – यह अधिकार है”
आगरा: जिले में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) का क्षेत्रीय कार्यालय खोलने की मांग अब 27 वर्ष पुरानी हो चुकी है, लेकिन यह अब वैधानिक अधिकार की तरह मजबूत हो गई है। लाखों छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों की परेशानी को देखते हुए संघर्ष समिति ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद शुरू कर दिया है। यह मुद्दा ब्रज क्षेत्र और पश्चिमी यूपी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां छोटे-मोटे बोर्ड कार्य (जैसे अंकपत्र, प्रमाणपत्र, नाम-जन्मतिथि संशोधन, सत्यापन आदि) के लिए प्रयागराज या मेरठ तक सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है।
संघर्ष की ताजा अपडेट (जनवरी 2026)
संघर्ष समिति के संयोजक और अध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने हाल ही में फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया से मुलाकात की। उन्होंने दो टूक कहा:
- “आगरा की यह जरूरत नहीं, बल्कि अधिकार है।”
- लाखों छात्रों को अनावश्यक परेशानी से मुक्ति दिलाने के लिए शासन स्तर पर तत्काल निर्णय लिया जाए।
यह मुलाकात मांग को मजबूती देने वाली है, और समिति अब शिक्षा निदेशक/शासन को प्रस्ताव भेजने की तैयारी में है।
क्यों इतनी जरूरी है यह मांग?
- वर्तमान स्थिति: यूपी बोर्ड के तहत हर साल 56 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी (हाईस्कूल + इंटर) शामिल होते हैं, लेकिन क्षेत्रीय कार्यालय सिर्फ 5 हैं – मेरठ, वाराणसी, बरेली, प्रयागराज और गोरखपुर।
- इन कार्यालयों पर भारी दबाव → अंकपत्र जारी करने में देरी, संशोधन में परेशानी, और छात्रों को दूर-दूर तक जाना पड़ता है।
- आगरा कार्यालय खुलने पर लाभ: 15 जिलों के छात्र-छात्राओं को सीधा फायदा – आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज, औरैया, कन्नौज, फर्रूखाबाद, इटावा, झांसी, जालौन (उरई) और ललितपुर।
- दौड़-भाग खत्म होगी, स्कूलों को कागजी काम में राहत मिलेगी, और बोर्ड की प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
इतिहास और प्रस्ताव
- मांग 1999 से चली आ रही है।
- 1999, 2001 और 2018 में शासन को औपचारिक प्रस्ताव भेजे गए – मेरठ और प्रयागराज क्षेत्र के कुछ जिलों का पुनर्गठन कर आगरा में नया कार्यालय खोलने की सिफारिश।
- लेकिन फाइलों में दबा रहा, जिसे समिति “लाखों छात्रों के साथ अन्याय” बता रही है।

