मथुरा।भारतीय जनता पार्टी के थिंक टैंक एवं महामंत्री संगठन रहे के.एन. गोविंदाचार्य, हाईकोर्ट के पूर्व जज एस.एस. कुलश्रेष्ठ और सुविख्यात धर्माचार्य ब्रह्मलीन राष्ट्र संत गीतानंद जी महाराज को पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए 23 नवंबर को वृंदावन पहुंचेंगे।राष्ट्र संत गीतानंद जी महाराज की 21वीं पुण्यतिथि पर वृंदावन के गांधी मार्ग स्थित गीता आश्रम में भव्य आयोजन किया जा रहा है। मुमुक्षु मंडल और गीता आश्रम वृंदावन के प्रमुख महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी अवशेषानंद महाराज ने बताया कि इस अवसर पर अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा सहित कई देशों में रहने वाले महाराजश्री के शिष्य और अनुयायी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।23 नवंबर, रविवार को सुबह 10 बजे से 11:30 बजे तक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होगा। इसके बाद 11:30 बजे से विशाल भंडारे की शुरुआत होगी। कार्यक्रम के दौरान हजारों साधुओं और जरूरतमंदों को ऊनी वस्त्र, कंबल आदि वितरित किए जाएंगे।स्वामी अवशेषानंद महाराज ने बताया कि संत गीतानंद जी महाराज राष्ट्र सेवा, मानव सेवा और धर्म कार्यों में सदैव अग्रणी रहे। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री कोष में 11 लाख रुपये और कोविड काल में भी 11 लाख रुपये का सहयोग दिया। उनका सिद्धांत था कि दान इस प्रकार दिया जाए कि “दाहिने हाथ से दिया दान बाएं हाथ को भी न पता चले।”पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी उनकी विनम्रता से प्रभावित हुए थे। जब महाराजश्री ने कारगिल युद्ध के बाद 11 लाख रुपये की थैली प्रधानमंत्री रक्षा कोष के लिए वाजपेयी को सौंपी, तो संतजी ने कहा था— “मैं तो केवल पोस्टमैन हूं, यह दान मेरे शिष्यों का है।”स्वामी गीतानंद महाराज का जीवन गीता के उपदेशों का जीवंत उदाहरण था। उन्हें गीता कंठस्थ थी और उन्होंने इसके सार को मानव जीवन में उतारकर समाज को व्यावहारिक दिशा दी।उन्होंने गोशालाओं की सेवा, संस्कृत पाठशालाओं की स्थापना, चिकित्सा शिविर, वृद्धाश्रम, हरिजन छात्रावास, प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य जैसे अनेक जनकल्याणकारी कार्यों को अपने जीवन का आधार बनाया।उनकी आराधना का मूल मंत्र था— “प्रभु तुम हरौ जनन की पीर।”वृंदावन की पावन भूमि, जहां चैतन्य महाप्रभु, बल्लभाचार्य, गोस्वामी परंपरा और बीसवीं शताब्दी के देवरहा बाबा, आनंदमयी मां, नीम करौली बाबा जैसे संतों की धारा प्रवाहित हुई— उसी परंपरा में स्वामी गीतानंद महाराज ने गीता के ज्ञान को जीवन का विज्ञान बनाकर समाज को नई दिशा दी।अपने दिव्य प्रवचनों से उन्होंने मानव सेवा और धर्म का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। उनके आश्रम में आने वालों को मन की शांति और समाधान की अनुभूति होती थी, जिसने ‘अनूपयति गीता आश्रम’ को अनेक भक्तों के लिए तीर्थ बना दिया।वृंदावन में आयोजित यह पुण्यतिथि कार्यक्रम संत गीतानंद महाराज के त्याग, सेवा और आध्यात्मिक धरोहर का स्मरण कर समाज को प्रेरणा देगा।

राहुल गौड एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा में सक्रिय रहते हुए उन्होंने विभिन्न समाचार माध्यमों के लिए निष्पक्ष और प्रभावशाली रिपोर्टिंग की है। उनके कार्य में स्थानीय मुद्दों की गंभीर समझ और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता की झलक मिलती है।

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