आगरा: आगरा में एक मां की न्याय की पुकार अब कोर्ट तक पहुंच गई है। युवक सोनू की संदिग्ध मौत का मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है, जहां मृतक की मां मुन्नी देवी ने थाना शाहगंज पुलिस पर गंभीर लापरवाही, आरोपियों को बचाने और मामले को दबाने का आरोप लगाया है। न्यायालय ने इसकी गंभीरता को देखते हुए 18 फरवरी 2026 को थाना शाहगंज से पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अब सभी की नजरें पुलिस रिपोर्ट और अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

परिजनों के अनुसार, ठेकेदार नीरज ने 27 नवंबर 2025 को सोनू को खेरिया मोड़ से काम दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया था। उसी दिन से सोनू लापता हो गया। परिवार ने खोजबीन की और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

30 नवंबर 2025 को सोनू की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई, जिससे परिवार का शक और गहरा हो गया। मुन्नी देवी का दावा है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें ठेकेदार नीरज सहित अन्य लोग शामिल हैं। उन्होंने कोर्ट में दाखिल प्रार्थना पत्र में पुलिस पर आरोप लगाया कि जांच में जानबूझकर ढिलाई बरती गई और आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई।

मुन्नी देवी ने आगे बताया कि परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं। आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत के जवाब में पुलिस ने भ्रामक रिपोर्ट लगाई और सोनू को “सुरक्षित” बताया था, जबकि कुछ दिनों बाद ही उसकी मौत हो गई। इसे उन्होंने पुलिस की बड़ी लापरवाही और गलत रिपोर्टिंग करार दिया। शिकायत में तीन पुलिस कर्मियों के नाम भी लिए गए हैं, जिन पर कार्रवाई न करने और गलत जानकारी देने का आरोप है।

यह मामला आगरा में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। स्थानीय लोग और सोशल मीडिया यूजर्स पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। एक पड़ोसी ने कहा, “एक मां का बेटा खो गया, पुलिस ने मदद नहीं की – अब कोर्ट ही उम्मीद है।”

पुलिस का पक्ष: शाहगंज थाना पुलिस ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद जांच तेज होने की उम्मीद है। मामले में हत्या की धारा (IPC 302) सहित अन्य धाराएं लगाई जा सकती हैं।

परिवार अब न्याय की आस में है और 18 फरवरी की सुनवाई का इंतजार कर रहा है। यह घटना यूपी में बढ़ते हत्या और पुलिस लापरवाही के मामलों की याद दिलाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे मजबूत सबूत होने पर त्वरित कार्रवाई जरूरी है।

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